बाग की विदाई

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जब आखिरी टोकरे ट्रक पर रखे जा चुके थे तो अगस्त की धूप पहले ही आसपास की पहाड़ियों के पीछे छिप रही थी। मीना ने सोलह साल की उम्र से हर गर्मी इस बाग में काम किया था लेकिन यह उसकी आखिरी पाली थी। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया था और वह अगले साल वापस नहीं आएगी। मालिक श्री अग्रवाल ने सुबह उससे हाथ मिलाया था और कहा था कि सब उसे याद करेंगे। उनकी पत्नी ने भी नींबू का केक बनाया था। फिर भी माहौल थोड़ा शांत सा लगा जैसे सब जानते हों कि अंत को बिना बोले ही छोड़ देना आसान होता है।

मीना ने दोपहर बाद आखिरी देर से पके सेब तोड़े थे और पिछले आठ हफ्तों से वही हरकत दोहराने के कारण उसके हाथ दुख रहे थे। चार बजे वह दो निगलों को कतारों के ऊपर उड़ते देखने के लिए रुक गई थी। यह नजारा उसे पहले दिन की याद दिला रहा था जब वह घबराई हुई आई थी। उस दिन उसने दो टोकरे गिरा दिए थे और फल खराब हो गए थे जिस पर फोरमैन ने हल्की डांट लगाई थी। अब वह दस मिनट में बिना गलती के एक टोकरा भर लेती थी।

पांच बजे से पहले बाकी मौसमी मजदूर पुराने पत्थर के खलिहान के पास जमा हो गए। सुनील जो पूरी गर्मी ट्रैक्टर चलाता रहा था अपने बचाए हुए घर के सेब के रस की बोतल निकाल लाया। वे प्लास्टिक के कप बांट रहे थे और रोशनी सुनहरी हो रही थी। मीना सुन रही थी कि उसके साथी गर्मी की बातें कर रहे थे — वह दिन जब सिंचाई की नली फट गई थी, वह दोपहर जब एक पर्यटक सबसे ऊंचे पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, और वह सुबह जब ओलों ने पूरी फसल को खतरे में डाल दिया था। उसे एहसास हुआ कि शायद वह उनमें से ज्यादातर को फिर कभी नहीं देख पाएगी।

जब कप खाली हो गए तो श्री अग्रवाल नींबू का केक लेकर आए। उन्होंने सबको मेहनत के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि बाग को इतनी लगन वाली टीम मिलना अच्छा रहा। मीना के गले में अचानक गांठ सी बन गई। उसे उम्मीद नहीं थी कि एक अस्थायी नौकरी से इतना लगाव हो जाएगा। छह बजकर पंद्रह मिनट पर जब वह आखिरी बक्से ट्रक पर लादने में मदद कर रही थी तो सोच रही थी कि क्या दिल्ली के नए विद्यार्थी कभी समझ पाएंगे कि पके फल की महक के बीच पेड़ों के पास शाम के समय खड़े होना क्या होता है।

बाद में जब वह परिचित गली से घर की ओर साइकिल चला रही थी तो मीना ने एक बार पीछे देखा। बाग की रोशनियां जल चुकी थीं और गहराते अंधेरे में धीमी चमक रही थीं। उसने वहां धैर्य सीखा था शारीरिक मेहनत का संतोष और वह शांत उदासी जो तब आती है जब कोई अच्छी चीज अपने आप खत्म हो जाती है। कल वह विश्वविद्यालय के लिए सामान बांधना शुरू करेगी लेकिन आज रात नींबू के केक का स्वाद और साथ मिलकर पिए गए रस की याद उसे घर तक साथ छोड़ गई।

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1मीना ने इस आखिरी गर्मी में बाग में कितने समय तक काम किया था?
2मीना निगलों को देखने के लिए किस समय रुकी?
3घर के सेब के रस की बोतल किसने निकाली?
4आखिरी बक्से किस समय तक ट्रक पर लादे गए?
5श्री अग्रवाल की पत्नी ने मीना के आखिरी दिन के लिए क्या बनाया?

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