बगीचे का आश्चर्य
B1पिछले शनिवार की दोपहर में धूप तेज चमक रही थी। मीरा और उसके भाई रोहन अपने पिछवाड़े में एक छोटा सा सब्जी का बगीचा तैयार कर रहे थे। उन्होंने पहले कभी सब्जियां नहीं उगाई थीं इसलिए उन्हें खुशी भी थी और थोड़ी घबराहट भी। मीरा टमाटर के पौधों के लिए गड्ढे खोद रही थी जब रोहन को अचानक मिट्टी के नीचे धातु का एक पुराना डिब्बा मिल गया। वह उस पर लगी मिट्टी साफ कर रहा था कि मीरा काम रोक कर उसके पास आ गई।
दोनों ने मिलकर डिब्बा खोला और अंदर कुछ पुराने बगीचे के औजार तथा एक मुड़ा हुआ कागज मिला। कागज पर लिखा था कि पुराने मालिक ने कई साल पहले फूलों के बीज बोए थे और उम्मीद की थी कि कोई आगे भी यह काम करेगा। चूंकि उन्होंने पहले ही टमाटर और सलाद के छोटे पौधे खरीद लिए थे इसलिए उन्होंने कागज की सलाह मानते हुए फूल भी लगाने का फैसला किया।
जब वे सलाद लगा रहे थे तभी आसमान में काले बादल छा गए और जोरदार बारिश शुरू हो गई। उन्होंने जल्दी से नए पौधों को प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया जो उन्होंने पहले से तैयार रखी थीं। शाम तक बारिश रुक चुकी थी और बगीचा उनकी उम्मीद से कहीं बेहतर दिख रहा था।
मीरा ने वादा किया कि वह हर सुबह स्कूल जाने से पहले पौधों को पानी देगी और रोहन ने फुटबॉल की प्रैक्टिस के बाद कीड़ों की जांच करने का जिम्मा लिया। अगर अगले हफ्ते मौसम गर्म रहा तो उन्हें विश्वास है कि टमाटर जल्दी बढ़ेंगे। उनकी मां रसोई की खिड़की से देख रही थीं और मुस्कुरा रही थीं क्योंकि उन्हें पहले डर था कि बच्चे एक ही दिन में रुचि खो देंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। अब दोनों बच्चे अगले वसंत में क्या लगाएंगे इसकी योजना बना रहे हैं।