किरायानामे की समीक्षा
C1वकीलनमस्ते पटेल जी। क्या हम इस किरायानामे की मुख्य धाराओं पर एक एक करके आगे बढ़ें? हस्ताक्षर करने से पहले मैंने कुछ ऐसे बिंदुओं पर निशान लगाए हैं जिन पर मेरी राय में स्पष्टीकरण ज़रूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की ग़लतफ़हमी न रह जाए।
रेखा पटेलजी, कृपया शुरुआती हिस्से से ही शुरू कीजिए। मैं अवधि और समय से पहले मकान छोड़ने की शर्तों के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना चाहती हूँ।
वकीलपहली धारा पहली अक्टूबर से शुरू होने वाली चार साल की निश्चित अवधि तय करती है, और इसमें अपने आप नवीनीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। चूँकि अवधि ग्यारह महीने से अधिक है, इसलिए यह करार उप पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत कराना और उस पर मुद्रांक शुल्क देना अनिवार्य होगा। यदि आप पहले मकान छोड़ना चाहें तो छह महीने का लिखित नोटिस देना होगा, हालाँकि करार में इसके लिए किसी आर्थिक दंड का उल्लेख नहीं है।
रेखा पटेलयह उचित लगता है, लेकिन मैं देख रही हूँ कि किराया पैंतालीस हज़ार रुपये प्रति माह लिखा है, जो हर महीने अग्रिम देना होगा। क्या अवधि के दौरान इसकी समीक्षा की कोई व्यवस्था है?
वकीलजी हाँ, है। चौथी धारा चौबीस महीने के बाद किराए में बढ़ोतरी की अनुमति देती है, जिसकी अधिकतम सीमा पाँच प्रतिशत है, बशर्ते मकान मालिक आसपास के तुलनात्मक किरायों का प्रमाण दें। यह बढ़ोतरी तीस दिन का पूर्व लिखित नोटिस दिए बिना लागू नहीं हो सकती।
रेखा पटेलसमझ गई। अब आगे बढ़ते हैं, मरम्मत और रखरखाव के बारे में यह करार क्या कहता है? मैं ढाँचे से जुड़े बड़े काम की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहती।
वकीलसातवीं धारा रोज़मर्रा का रखरखाव किराएदार पर डालती है, जबकि छत, बाहरी दीवारों और बड़ी व्यवस्थाओं की ज़िम्मेदारी मकान मालिक के पास रहती है। शुरुआत में ही सामान और उसकी हालत की विस्तृत सूची बनवा लेना समझदारी होगी, ताकि बाद में फ़िटिंग की दशा पर विवाद न हो।
रेखा पटेलऔर विवाद निपटाने वाली आख़िरी धारा अदालत में मुक़दमे के बजाय मध्यस्थता की बात करती है। ऐसी कार्यवाही आख़िर कहाँ होगी?
वकीलकोई भी मध्यस्थता भारतीय मध्यस्थता परिषद के नियमों के अंतर्गत मुंबई में होगी। मकान मालिक और किराएदार के बीच का ऐसा विवाद संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के दायरे में आता है, इसलिए इस धारा पर कोई आपत्ति नहीं बनती। करार में यह भी लिखा है कि जब तक मध्यस्थ कुछ और तय न करें, हर पक्ष अपना ख़र्च स्वयं उठाएगा।
रेखा पटेलधन्यवाद। एक आख़िरी बात, आगे किराए पर देने वाली धारा मुझे काफ़ी सख़्त दिखती है। क्या उसमें बातचीत की कोई गुंजाइश बचती है?
वकीलवह पूर्व लिखित सहमति के बिना आगे किराए पर देने से रोकती है, और मकान मालिक यह सहमति केवल उचित आधार पर ही रोक सकते हैं। पाठ में यह परिभाषित नहीं है कि उचित आधार क्या है, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर बातचीत की कुछ गुंजाइश बची रहती है।